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Char Dham Yatra 2023: चार धाम रूट पर मोबाइल नेटवर्क करेगा परेशान, बदरीनाथ-केदारनाथ मार्ग सहित 91 किमी में कनेक्टिविटी की दिक्कत

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Char Dham Yatra 2023: यूपी, एमपी सहित देश के अन्य राज्यों से चार धाम यात्रा 2023 पर उत्तराखंड आ रहे हैं तो आपको परेशानी हो सकती है। यात्रा रूट पर मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं होने से आप कुछ परेशन हो सकते हैं। चिंता की बात है कि चार धाम यात्रा रूट पर कुल करीब 91 किमी मार्ग पर अब भी मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बीएसएनएल को इन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी प्राथमिकता पर बहाल करने को कहा है। चारधाम की फिजिकल और डिजिटल कनेक्टविटी को लेकर पीएमओ के अधिकारियों ने उत्तराखंड शासन, बीएसएनएल और एनएचआई के अधिकारियों के साथ वीसी के जरिए विचार विमर्श किया। जिसमें मुख्य रूप से डिजिटल कनेक्टिविटी सुधारने पर जोर दिया।

अधिकारियों ने बताया कि चारों धामों में मोबाइल कनेक्टिविटी किसी ना किसी रूप में उपलब्ध है, लेकिन बीच के रास्तों पर अब भी कई डॉर्क जोन हैं। किसी भी आपातकालीन स्थिति में यह डार्क जोन खतरनाक साबित होते हैं। बैठक में तय किया गया कि यात्रा मार्ग पर सभी ऑपरेटर कॉमन इंफ्रा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें:बदरीनाथ-केदारनाथ चार धाम यात्रा 2023 को लेकर जबरदस्त उत्साह, WhatsApp सहित 4 विकल्पों से कराएं रजिस्ट्रेशन

साथ ही बीएसएनएल प्राथमिकता पर इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी सुधारेगा। बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, केंद्र सरकार के अपर सचिव कांता राव, निदेशक आईटीडीए नितिका खंडेलवाल, पीएमओ में उत्तराखंड कैडर के अधिकारी मंगेश घिल्डियाल के साथ ही डीएम और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी भी शामिल हुए।

यहां हो होगी मोबाइन नेटवर्क की परेशानी

चार धाम यात्रा रूट पर बद्रीनाथ मार्ग पर अलग- अलग कुल 30 किमी मार्ग डार्कजोन में आता है। इस रूट पर हनुमानचट्टी से देवदर्शनी मोड तक का 15 किमी मार्ग का हिस्सा शामिल है। इसी तरह केदारनाथ मार्ग पर जंगलचट्टी के पास चार किमी हिस्सा, गंगोत्री में सुक्खीटॉप के निकट का 35 किमी हिस्से में भी कनेक्टिविटी नहीं है। यमुनोत्री में धाम सहित मार्ग पर यही स्थिति है, हालांकि धाम में बीएसएनएल का सेटेलाइट आधारित टॉवर है।



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खुशखबरी : दिल्ली के स्कूलों में जल्दी होगी 26 हजार शिक्षकों की भर्ती, HC ने केजरीवाल सरकार को दिया आदेश

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दिल्ली में 26 हजार से अधिक शिक्षकों की जल्द भर्ती होगी। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार और नगर निगम को अपने स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।



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Odisha Train Accident: बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा; चश्मदीदों का दावा – मलबे में दबे हैं शरीर के अंग

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ओडिशा के बालासोर में कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। जानकारों का मानना ​​है कि यह संख्या 300 से अधिक हो सकती है। शनिवार शाम तक रेलवे सूत्रों ने बताया है कि मरने वालों की संख्या 288 है। 800 से ज्यादा घायल। लेकिन चश्मदीदों का कहना है कि शरीर के अंग अब भी मलबे में दबे हुए  हैं। मलबे के नीचे कई शव भी दबे हो सकते हैं। नतीजतन, मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। रेल सेवा शनिवार से सेवा सामान्य करने की कवायद शुरू हो गई है। लेकिन यह काफी समय लेने वाला माना जाता है।

संयोग से 10 मई 2010 को ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस हादसे में 148 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले, 2 अगस्त 1999 को रेलवे अधिकारियों के अनुसार, उत्तर बंगाल में इस्लामपुर के पास गेसल में एक रेल दुर्घटना में 285 लोगों की मौत हो गई थी। बालासोर कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे में मरने वालों की संख्या ने इन हादसों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यदि मरने वालों की संख्या 300 को पार कर जाती है, तो दुर्घटना पूर्वी भारत में हाल के दिनों में घटने वाली सबसे घातक रेल दुर्घटना होगी।

जांच के बाद रेलवे की प्रारंभिक रिपोर्ट में कोरोमंडल हादसे का कारण सिग्नलिंग में खराबी बताया गया है। हालांकि, रेलवे अधिकारियों के एक वर्ग के अनुसार, विस्तृत जांच से दुर्घटना के कारणों का पता चल पाएगा। साइट निरीक्षण के बाद एक संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया, “अप मेन लाइन पर हरी झंडी दे दी गई थी। लेकिन ट्रेन उस लाइन में नहीं आई। ट्रेन लूप लाइन में चली गई। वहां पहले से ही एक मालगाड़ी खड़ी थी। उससे टक्कर में कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, ”इस बीच बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस डाउन लाइन से होते हुए बालासोर की ओर जा रही थी। उस ट्रेन के दो डिब्बे भी पटरी से उतरे। लेकिन मेन लाइन पर हरी झंडी मिलने के बावजूद अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस लूप लाइन में कैसे आई। ऐसे में माना जा रहा है कि सिग्नल देने में गलती हुई होगी।”

कब तक चालू होगी ट्रेनों की आवाजाही

रेलवे की ओर से आधिकारिक तौर पर इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है। हालांकि, रेलवे बचाव कार्य से जुड़े अनुभवी लोगों के एक समूह ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि सोमवार से पहले पूरी तरह से मलबा हटाना संभव नहीं है। ऐसे में मंगलवार को ट्रेन सेवाएं सामान्य हो सकती हैं। दरअसल, अब रेलवे का सिरदर्द रूट पर सेवाओं को पूरी तरह से सामान्य करने का है। मलबे हटाने का काम शनिवार से शुरू हो गया। हालांकि, दुर्घटनास्थल पर रेलवे लाइन के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। सीमेंट के स्लीपर टूटे हुए हैं, लोहे की छड़ें निकली हुई है। रेलवे के एक सूत्र ने दावा किया, मंगलवार से पहले उस रूट पर रेल सेवाएं पूरी तरह सामान्य होने की संभावना नहीं है।

हालांकि आपात स्थिति में कम से कम एक लाइन अप और डाउन लाइन पर ट्रेनों को चलाने का प्रयास करेगी। पश्चिम बंगाल से बहुत से लोग इलाज के लिए दक्षिण भारत जाते हैं। इसके अलावा, सबसे लोकप्रिय बंगाली तीर्थ स्थलों में से एक पुरी जाने वाली सभी ट्रेनें बालासोर से होकर गुजरती हैं। रविवार को स्नान के कारण कई तीर्थयात्रियों के पास पुरी जाने वाली ट्रेन का टिकट था। ऐसे में कई ट्रेनों के रद्द होने से भारी आर्थिक नुकसान होने का खतरा है। 

बचाव कार्य कैसे हुआ?

हादसा शुक्रवार शाम करीब सात बजे हुआ। इसके बाद से बालासोर में स्थिति गंभीर है। यात्रियों को बचाने के लिए रात भर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बचावकर्मियों से लेकर अस्पताल के डॉक्टर तक सब बचाव में कूद पड़े। आपदा प्रबंधन अधिकारियों से लेकर दमकलकर्मियों तक रात के अंधेरे से लेकर शनिवार सुबह तक बचाव कार्य जारी है। शुक्रवार शाम हादसे के बाद एंबुलेंस और मोबाइल हेल्थ यूनिट की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। शुक्रवार शाम से कुल 200 एंबुलेंस, 50 बसें और 45 मोबाइल हेल्थ यूनिट मौके पर पहुंच चुकी हैं। पटरी से उतरे डिब्बे के फर्श से यात्रियों को बचाने के लिए गैसकटर का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोग भी सामने आए। घायल यात्रियों को बचाया तो कभी पानी देकर उनकी प्यास बुझाई। कभी-कभी वह रेलवे लाइन के आसपास बिखरे सामानों को इकट्ठा कर एक जगह करते हुए नजर आए। कई लोग अस्पताल में घायलों के लिए रक्तदान करने के लिए कतार में खड़े हैं।



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ओडिशा रेल हादसे के चलते आवाजाही पर असर; 48 ट्रेनें रद्द, जानें कितनों का बदला रास्ता

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भारतीय रेल के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण पूर्व रेलवे ने चेन्नई-हावड़ा मेल, दरभंगा-कन्याकुमारी एक्सप्रेस और 3 जून को अपनी यात्रा शुरु करने वाली कामख्या-एलटीटी एक्सप्रेस को रद्द कर दिया है।



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